Kanpur-Prayagraj में 6.5+ Magnitude भूकंप का खतरा, सिस्टम बेपरवाह?

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे उत्तर भारत को हिला दिया था। उस आपदा का केंद्र था Nepal, लेकिन झटके उत्तर प्रदेश तक महसूस किए गए। वक्त बीता, डर धुंधला पड़ा पर खतरा गया नहीं।

IIT Kanpur की रिसर्च: गंगा मैदानी क्षेत्र संवेदनशील

हालिया अध्ययन में Indian Institute of Technology Kanpur ने चेतावनी दी है कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों खासतौर पर Kanpur और Prayagraj—में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन इलाकों की भौगोलिक संरचना (alluvial soil deposits) झटकों को amplify कर सकती है। यानी जमीन खुद कंपन को बढ़ा सकती है।

“हमने ऊंची इमारतें तो खड़ी कर लीं, पर नींव की चिंता फाइलों में दबा दी।”

सिस्टम की तैयारी: ड्रिल या ड्रामा?

2015 के बाद आपदा प्रबंधन को लेकर कई बैठकें हुईं, योजनाएं बनीं, मॉक ड्रिल की तस्वीरें भी आईं। लेकिन जमीनी स्तर पर कितनी इमारतें seismic norms के अनुसार बनीं?

विशेषज्ञ मानते हैं कि अनियमित निर्माण, पुरानी इमारतों की structural कमजोरी। घनी आबादी वाले बाजार। किसी बड़े झटके में जोखिम को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

“भूकंप चेतावनी नहीं देता, पर हमारी लापरवाही जरूर संकेत देती है।”

गंगा का मैदान: Soft Soil, Hard Reality

गंगा के मैदानी इलाके की मिट्टी अपेक्षाकृत मुलायम है, जिससे seismic waves की तीव्रता बढ़ सकती है। यही वजह है कि moderate magnitude का भूकंप भी severe impact में बदल सकता है।

यह सिर्फ वैज्ञानिक डेटा नहीं, एक पॉलिसी टेस्ट भी है क्या शहरी प्लानिंग ने रिसर्च को गंभीरता से लिया?

क्या करना होगा?

Building code का सख्त पालन। पुरानी इमारतों का structural audit, स्कूल, अस्पताल और सरकारी भवनों की seismic safety जांच, आम लोगों में awareness अभियान। आपदा इंतजार नहीं करती तैयारी करनी पड़ती है।

डर नहीं, डेटा देखिए

IIT की यह रिसर्च डर फैलाने के लिए नहीं, जागरूक करने के लिए है। सवाल है क्या हम 2015 की यादों को सबक में बदल पाए हैं? क्योंकि अगला झटका तारीख बताकर नहीं आएगा।

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